Aar do, ya paar do | Short Poem

तेरे इंतज़ार में कलियों ने जाने कितने मौसम देख लिए  इन्हें इनकी तकदीर बता दो, चाहे ख़िज़ा दो या बहार दो   अब तो यह भी याद नहीं रह...

Akhiri Khat (आखिरी खत)

अश्कों की स्याही से लिखे कुछ ख़त , और मोड़ कर सिरहाने रख लिए|  कुछ नज्में थीं , कुछ बातें थीं , कुछ आँखों में बीती रातें थी|  दिल...

बे आवाज़

हर छोटी बात आज कल रुला देती है, कोई परेशान रहे, ये सह नहीं पता, जाने क्यों पर खैर कौन किसी के ग़म में रोया है कभी बेशक अपना  ही ...

अह्ल-ऐ -सफ़र | Short Poem

हर दौर में रहते हैं, नए दौर की तलाश में सफ़र को दस्तूर बना रखा है अपने ही ख़्वाबों को अधर में , भंवर में , डूबने को छोड़ ...