बे आवाज़

हर छोटी बात आज कल रुला देती है, कोई परेशान रहे, ये सह नहीं पता, जाने क्यों पर खैर कौन किसी के ग़म में रोया है कभी बेशक अपना  ही ...

अह्ल-ऐ -सफ़र | Short Poem

हर दौर में रहते हैं, नए दौर की तलाश में सफ़र को दस्तूर बना रखा है अपने ही ख़्वाबों को अधर में , भंवर में , डूबने को छोड़ ...